Monday, 21 August 2017

स्मरण शक्ति की कमी

स्मरण शक्ति कमजोर होने पर व्यक्ति को लगता है, जैसे उसका दिमाग खाली हो| उसे प्राय: चक्कर आता है| एकाग्रता नष्ट हो जाती है| यह रोग उन लोगों को अधिक होता है जो दूध, दही, घी, मक्खन, अंकुरित अनाज, फल आदि पौष्टिक पदार्थों का सेवन बहुत कम मात्रा में करते हैं|

कारण 

अत्यधिक मानसिक श्रम, पाचन क्रिया की गड़बड़ी, शारीरिक कमजोरी, मानसिक दुर्बलता, जन्म के समय दिमागी कमजोरी, अत्यधिक संभोग, लम्बी बीमारी एवं रक्तहीनता आदि कारणों से स्मरण शक्ति कम हो जाती है|

पहचान 

इस रोग में देखा हुआ, सोचा हुआ तथा पढ़ा हुआ कुछ भी याद नहीं आता| काफी देर तक सोचने के बाद कुछ बातें याद आती हैं| व्यक्ति जो कुछ सोचता तथा करता है, उसको विश्वास नहीं हो पाता कि मैं ठीक कर रहा हूं या गलत|

नुस्खे

1. प्रतिदिन प्रात:काल एक चम्मच आंवले का रस शहद के साथ चाटना चाहिए|
2. आंवला, गिलोय और जटामासी - सबको बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें| फिर 2 ग्राम चूर्ण सुबह के समय ताजे पानी से सेवन करें|
3. सुबह दो चम्मच शहद गुनगुने पानी में मिलाकर पीना चाहिए|
4. तिल तथा शक्कर के लड्डू नित्य खाने से मानसिक शक्ति बढ़ती है|
5. सुबह-शाम दो-दो चम्मच सौंफ तथा मिश्री का चूर्ण सेवन करें|
6. खरबूजे के बीज तवे पर भूनकर चबा-चबाकर खाने से याददाश्त ठीक हो जाती है|
7. प्रतिदिन 5-6 कलिमिर्चों का चूर्ण शहद या शक्कर से लेना चाहिए|
8. कद्दू की खीर खाने से दिमाग की शक्ति बढ़ती है|
9. बादाम की दो गिरी तथा एक चम्मच सोंठ दूध में मिलाकर सेवन करें|
10. पीपल वृक्ष की छाल 5 ग्राम की मात्रा में कूट-पीसकर उतनी ही शक्कर या खांड़ मिलाकर सेवन करें| ऊपर से दूध पी लें|
11. गेहूं के लांक चबाने से स्मरण शक्ति ठीक हो जाती है| सात-आठ लांक (घास) का रस नित्य पिएं|
12. लीची का रस प्रतिदिन को चम्मच की मात्रा में सेवन करें|
13. सौंफ को पीसकर उसका चूर्ण दो चम्मच की मात्रा में शहद के साथ सेवन करें|
14. मुलहठी का चूर्ण एक चम्मच प्रतिदिन दूध के साथ सेवन करें|
15. प्रतिदिन सुबह के समय एक कप गाजर का रस पीना चाहिए|

नपुंसकता

स्वस्थ वीर्य हिमानुश्य का पुरुषार्थ है| स्त्री-भोग का आनंद स्तम्भन शक्ति में निहित है| बहुत अधिक मैथुन करने, असमय मैथुन करने, खट्टे, कड़वे, रूखे, कसैले, खारे एवं चटपटे पदार्थ खाने, मानसिक तनाव रखने तथा अप्राकृतिक साधनों से वीर्य त्यागने पर ही व्यक्ति में नपुंसकता उत्पन्न होती है|

कारण

अधिक मात्रा में स्त्री सम्भोग, हस्तमैथुन की आदत, चोट लगना, शरीर में चर्बी बढ़ना, कोई गम्भीर रोग, अण्डकोश का रोग, बहुमूत्र, पेट सम्बंधी बीमारी, अत्यधिक शराब पीना तथा अफीम खाना आदि कारणों से नपुंसकता का रोग उत्पन्न हो जाता है| यह शारीरिक होने के साथ-साथ मानसिक अधिक है|

पहचान

नपुंसकता के कारण व्यक्ति की मैथुन शक्ति खत्म हो जाती है| वह थोड़ी-सी उत्तेजना के बाद ही स्खलित हो जाता है| रोगी का शिश्न कमजोर पड़ जाता है| उसके मन में हर समय यही भय समाया रहता है की वह स्त्री को संतुष्ट तथा तृप्त नहीं कर पाएगा| उसका श्वास फूलने लगता है और शरीर में बेवजह पसीना आ जाता है| मानसिक अशान्ति के कारण उसकी इन्द्रिय में उत्थान नहीं आता| रोगी पुरुष स्त्री के सामने अपने को लज्जित मानने लगता है| इसी कारण उसे रात को नींद नहीं आती|

नुस्खे

1. दो चम्मच भैंस का घी प्रतिदिन काली मूसली के साथ खाएं|
2. सुबह के नाश्ते में दो छुहारे और थोड़ी-सी किशमिश दूध के साथ लें|
3. आम की थोड़ी-सी मंजरी को सुखाकर चूर्ण बना लें| 3 ग्राम चूर्ण रात के सोते समय आधा किलो दूध के साथ सेवन करें|
4. 100 ग्राम मूली के बीज महीन पीसकर चूर्ण बना लें| इसमें से 5 ग्राम चूर्ण मक्खन या मलाई के साथ सुबह-शाम खाएं| यह पुरुषत्व बढ़ाने वाला एक बेहतरीन नुस्खा है|
5. सेंधा नमक एक चुटकी, कबूतर की बीट 5 ग्राम तथा शहद दो चम्मच - तीनों को मिलाकर सेवन करने से शिश्न में उत्थान आने लगता है|
6. प्रतिदिन गाजर का अर्क एक कम की मात्रा में कुछ दिनों तक पिएं|
7. 3 ग्राम आक के फूलों का रस घी के साथ पकाकर खाएं| यह नपुंसकता दूर करने का बढ़िया नुस्खा है|
8. एक बताशे में चार बूंद बरगद का दूध डालकर सेवन करें|
9. दो चम्मच लहसुन का रस थोड़े से शहद में मिला लें| इसके दो भाग करें| एक भाग सुबह और एक भाग शाम को चाट लें|
10. शतावरी चूर्ण 15 ग्राम, सफेद मूसली का चूर्ण 10 ग्राम, मुलहठी का चूर्ण 10 ग्राम तथा अकरकरा चूर्ण 3 ग्राम - सबको मिलाकर एक शीशी में भर लें| इसमें से 5-5 ग्राम चूर्ण दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें|

शीघ्रपतन

पुरुष द्वारा स्त्री को संतुष्ट किए बिना उद्वेग के चरम क्षणों में स्खलित हो जाना, शीघ्रपतन कहलाता है| इसका मुख्य कारण हीन भावना तथा आत्मविश्वास की कमी होता है| ऐसे व्यक्ति को मन में कामुकता का विचार नहीं रखना चाहिए|

कारण 

स्त्री से अधिक सम्भोग करने, हस्तमैथुन की आदत, पुष्टिकारक भोजन की कमी, जननेन्द्रिय सम्बंधी रोग, मदिरापान तथा अन्य नशीली चीजों का सेवन शीघ्रपतन रोग के कारण बन जाते हैं|

पहचान

पुरुष स्त्री से सम्भोग करने से पहले या कुछ ही समय बाद वीर्यापात कर बैठता है| शीघ्रपतन के कारण पुरुष को स्त्री के सामने लज्जित होना पड़ता है, क्योंकि स्त्री संतुष्ट नहीं हो पाती| धीरे-धीरे व्यक्ति की शारीरिक शक्ति भी क्षीण हो जाती है| वह स्त्री से प्यार करने, उसे चिपटाने या चुम्बन लेने मात्र से ही स्खलित हो जाता है| ऐसे पुरुषों की स्त्रियों को बहुत कष्ट उठाने पड़ते हैं| कई बार वे अन्य पुरुषों से अवैध सम्बंध स्थापित कर लेती हैं|

नुस्खे 

1. प्रतिदिन सुबह के समय दो छुहारे चबाकर ऊपर से आधा किलो गाय का दूध पीना चाहिए|
2. ईसबगोल, खसखस और मिश्री - सब 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर सेवन करें| ऊपर से दूध पी जाएं|
3. दो चम्मच प्याज के रस में शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह के समय खाली पेट लेना चाहिए|
4. तुलसी के पौधे की जड़ का चूर्ण चौथाई चम्मच घी में मिलाकर लें|
5. कौंच के बीज तथा तालमखाना - दोनों के 5-5 ग्राम चूर्ण दूध या मिश्री के साथ सेवन करें|
6. प्रतिदिन चाय के साथ लहसुन की 10 बूंदें सेवन करें| ऊपर से आधा किलो दूध पिएं| लहसुन सेक्स सम्बंधी सभी प्रकार के रोगों के लिए रामबाण है|
7. मूली के बीजों को तेल में मिलाकर औटा लें| फिर इस तेल से शरीर की मालिश करें|
8. बबूल के चार-पांच पत्ते तथा 5 ग्राम गोंद पानी में भिगोकर मसल डालें| फिर उनको पानी सहित पी जाएं| ऊपर से दूध का सेवन करें|

स्वप्नदोष

यदि रात को सोते समय किसी काल्पनिक स्त्री से मैथुन क्रिया करने के पश्चात् वीर्य स्खलित हो जाए तो यह स्वप्नदोष कहलाता है| महीने में एक-दो बार स्वप्नदोष का होना, रोग नहीं माना जाता| लेकिन अधिक बार होने से यह रोग हो जाता है| यदि समय पर इस रोग का इलाज न किया जाए तो यह मधुमेह जैसे भयानक रोग में बदल जाता है|

कारण 

गरिष्ठ भोजन करने, गंदी पुस्तकें पढ़ने, अश्लील फिल्मों को देखने, निरंतर विषय-भोग की बातें करने, कामोत्तेजक विचारों में डूबे रहने, हस्तमैथुन में रुचि रखने तथा उत्तेजक पदार्थों का सेवन अधिक करने के कारण युवाओं को स्वप्नदोष होने लगता है|

पहचान 

स्वप्नदोष होने के कारण शरीर में क्षीणता, चेहरे पर मायूसी, मस्तिष्क में कमजोरी, आंखें भीतर की ओर धंसी हुई, कायरता, सिर में दर्द एवं भारीपन, थकावट, कब्ज, शरीर टूटना, बैठे-बैठे ऊंघना, मैथुन शक्ति का ह्लास, उत्तेजना, बात-बात में क्रोध करना आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं|

नुस्खे 

1. 10 ग्राम शतावरी चूर्ण को देशी घी में मिलाकर सुबह-शाम खाएं|
2. 5 ग्राम इलायची के दाने तथा 5 ग्राम ईसबगोल की भूसी-दोनों को मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें|
3.  नित्य सुबह चांदी का वर्क लगाकर एक आंवले का मुरब्बा खाएं|
4. पके हुए बेल का गूदा 10 ग्राम, भांग 1 ग्राम, धनिया 10 ग्राम तथा सौंफ 5 ग्राम - सबको पीसकर चटनी बना लें| यह चटनी खाकर ऊपर से दूध पी लें|
5. गोखरू, सूखे आंवले और गिलोय - सभी 5-5 ग्राम लेकर चूर्ण बना लें| इसमें से 3 ग्राम चूर्ण घी और चीनी के साथ प्रतिदिन सेवन करें|
6. रोज दो केले खाकर ऊपर से आधा लीटर दूध पीने से स्वप्नदोष में काफी लाभ होता है|
7. 4 ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ खाएं|
8. चोपचीनी का चूर्ण 5 ग्राम नित्य सवेरे के समय घी के साथ खाएं| 10 दिनों में ही काफी लाभ दिखाई देने लगेगा|

स्तनों का ढीलापन

स्त्री की सुन्दरता तथा यौवन का निखार पुष्ट स्तनों से दिखाई देता है| इसलिए से प्राय: अपना स्तन पुष्ट और कठोर बनाने के लिए प्रयत्नशील रहती हैं| स्तनों में ढीलापन होना, समय के साथ उनका विकास न होना तथा उनमें कठोरता का अभाव होना आदि स्थितियां स्त्री को हीन भावना से ग्रस्त कर देती है|

कारण

शारीरिक कमजोरी, मासिक धर्म की अनियमितता, अधिक सम्भोग, शरीर में बुखार का रहना आदि कारणों से स्तन ढीले पड़ जाते हैं| कुछ स्त्रियों के स्तनों की गोलाई बहुत कम होती है| ऐसी हालत में स्त्री को कोई न कोई रोग अवश्य होता है, क्योंकि तब स्तनों को पुष्ट करने वाले हारमोन ठीक से नहीं बन पाते हैं|

पहचान

ऐसी स्त्रियों के स्तन ढीले अथवा छोटे होते हैं| उन्हें घर, परिवार तथा स्त्री-समाज में एक प्रकार की लज्जा का अनुभव होता है| वे हीन भावना से ग्रस्त तथा चिंतित रहती हैं|

नुस्खे

1. गाय का घी, काले तिल, काली निशोथ, बच तथा सोंठ - सबको मिलाकर पीस लें| फिर इनको आधा किलो तिली के तेल में पकाएं| थोड़ी देर बाद तेल को ठंडा करके शीशी में भर लें| इस तेल की मालिश सुबह स्नान करने से पूर्व स्तन पर 10 मिनट तक करें| स्तन पुष्ट तथा कठोर हो जाएंगे|
2. जैतून के तेल में थोड़ी-सी फिटकिरी पीसकर मिला लें| फिर इस तेल से स्तनों की अच्छी तरह मालिश करें| 3. कंधारी अनार के छिलकों को पानी के साथ पीसकर पेस्ट बना लें| इसमें 5 ग्राम पिसी हुई हल्दी मिलाए| अब इसे दोनों स्तनों पर निप्पल छोड़कर लगाएं| सूखने के बाद उरोजों को धो डालें| शीघ्र ही स्तनों की ढीली मांसपेशियों में तनाव आ जाएगा|
4. एक अंडा, नीबू का रस 10 ग्राम और बेसन 10 ग्राम - तीनों को दूध के साथ अच्छी तरह फेंट लें| फिर इस पेस्ट को स्तनों पर लगाएं|
5. राई पीसकर स्तनों पर लगाएं| स्तन पुष्ट हो जाएंगे|
6.  बरगद के दूध की स्तनों पर मालिश करें|
7. एरण्ड के पत्तों को गन्ने के सिरके में पीसकर स्तनों पर लेप लगाएं|
8. शहद में माजूफल का चूर्ण मिलाकर स्तनों पर लेप करें|

Sunday, 20 August 2017

मासिक धर्म का रुक जाना

मासिक धर्म स्त्री में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है| यदि मासिक धर्म में अनियमितता होती है तो स्त्री के शरीर में अन्य विकार उत्पन्न हो जाते हैं| इसका कारण शरीर के भीतर किसी रोग का होना भी हो सकता है| इसके सुचारु रूप से न होने पर स्त्री जीवन भर मातृत्व सुख से वंचित रह जाती है|

कारण 

शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी - इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता|

पहचान 

गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण हैं|

नुस्खे 

1. 3 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से माहवारी ठीक हो जाती है|
2. दूब का रस एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह के समय पीने से रुकी माहवारी खुल जाती है|
3. कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर कुछ दिनों तक खाने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|
4. ग्वारपाठे का रस दो चम्मच की मात्रा में खाली पेट लगभग दो सप्ताह तक सेवन करें|
5. 10 ग्राम तिल, 2, ग्राम कालीमिर्च, दो नग छोटी पीपल तथा जरा-सी शक्कर-सबका काढ़ा बनाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|
6. 3 ग्राम तुलसी की जड़ का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें|
7. 50 ग्राम सोंठ, 30 ग्राम गुड़, 5 ग्राम बायबिड़ंग तथा 5 ग्राम जौ - सबको मोटा-मोटा कूटकर दो कप पानी में औटाएं| जब पानी आधा कप रह जाए तो काढ़े का सेवन करें| रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|
8. बरगद की जटा, मेथी और कलौंजी - सब 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूट लें| फिर आधा किलो पानी में सब चीजें डालकर काढ़ा बनाएं| जब पानी आधा रह जाए तो छानकर शक्कर डालकर पी जाएं|
9. प्याज का सूप एक कप बनाएं| उसमें थोड़ा- सा गुड़ घोल लें| इस पीने से रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा| 10. दिन में तीन बार 2-2 ग्राम नामा गरम पानी से सेवन करना चाहिए| इससे मासिक धर्म खुल जाता है|

श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया)

अक्सर स्त्रियों की योनि से सफेद, लेसदार, झाग के रूप में बदबूदार पानी सा निकलता है, जिसको श्वेतप्रदर कहते हैं। इस रोग में स्त्री का शरीर बिल्कुल कमजोर हो जाता है।

कारण- 

स्त्री का मासिकधर्म आने पर शुरुआती 3 दिनों में नहाने से उनको श्वेतप्रदर (योनि में से सफेद पानी आना) का रोग हो जाता है। इसके अलावा यह रोग ज्यादा संभोग क्रिया करने से, मन में हर समय सेक्स के बारे में विचार रखने से, भोजन में तेल, खटाई, लालमिर्च, प्याज, अंडा, मांस आदि का ज्यादा सेवन करने से, गुप्त अंगों की ठीक प्रकार से सफाई न करने से भी हो जाता है।

चिकित्सा-

त्रिफला- श्वेतप्रदर रोग में लगभग आधा लीटर पानी में 12 ग्राम त्रिफला या 1 लीटर पानी में लगभग 6 ग्राम खाने वाले सोड़े को मिलाकर स्त्री को अपनी योनि में उस पानी की छींटे मारनी चाहिए। श्वेतप्रदर रोग में इस पानी की पिचकारी देना भी बहुत लाभकारी रहती है।

गूलर- श्वेतप्रदर रोग में स्त्री को लगभग 6 ग्राम गूलर या आधा ग्राम रसौत की सुबह और शाम को पानी के साथ फंकी लेने से लाभ होता है। अगर इन चीजों को मक्खन के साथ लिया जाए तो यह रोग जल्दी दूर हो जाता है।

ढाक- ढाक का गोंद, पीली कौड़ी, कीकर का गोंद और कहरूवा को अलग-अलग पीसकर और कपड़े में छानकर बराबर मात्रा में एकसाथ मिला लें। इस चूर्ण को 2-2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम ठंडे पानी के साथ लेने से श्वेतप्रदर रोग में आराम मिलता है। इस औषधि का सेवन करते समय रोगी स्त्री को गर्म, खट्टी और तली हुई चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

आंवला- लगभग 25 ग्राम आंवला को रात में 250 मिलीलीटर पानी में भिगोकर रख दें और सुबह उठने के बाद छान लें। इस छने हुए पानी में लगभग 12-12 ग्राम शहद और खांड मिलाकर पीने से श्वेतप्रदर रोग में लाभ होता है।

शराब- श्वेतप्रदर रोग में लगभग 12 ग्राम शराब को 125 ग्राम पानी में मिला लें। फिर लगभग 3 ग्राम मोटी इलायची और 2 ग्राम तेजपत्ता खाकर ऊपर से यह शराब मिला पानी रात में सोने से पहले एकबार पी लें।

चूहे की मींगनी का तेल- लगभग 250 ग्राम चूहे की मेंगनी को 4 लीटर पानी में डालकर पका लें। पकने के बाद जब लगभग 1 लीटर पानी बाकी रह जाए तो उस पानी में 250 ग्राम तिल का तेल डालकर आग पर रखकर पका लें और सिर्फ तेल बाकी रहने पर उतार लें। इस तेल में रुई के फाहे को भिगोकर योनि में ऱखने से गर्भाशय की सूजन और टेढ़ापन ठीक हो जाते हैं।